'सारे जहां से अच्छा' लिखने वाले इकबाल को DU के सिलेबस से हटाया, 13 घंटे बैठक के बाद लिया फैसला

Poet Mohammad Iqbal: दिल्ली यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस में बदलाव किया गया है। इसमें से कवि मोहम्मद इकबाल के चैप्टर को हटाया गया है। डीयू की अकेडमिक काउंसिल की बैठक में ये फैसला लिया गया।



नई दिल्ली: मशहूर गीत 'सारे जहां से अच्छा' लिखने वाले शायर मोहम्मद इकबाल के चैप्टर को दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अपने सिलेबस में से हटा दिया है। शुक्रवार को 13 घंटे से ज्यादा देर तक चली अकेडमिक काउंसिल की बैठक में ये फैसला लिया गया। इस बैठक में कवि इकबाल को पाठ्यक्रम से हटाने के लिए पॉलिटिकल साइंस के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया। इसके साथ ही गांधी पर आधारित एक पेपर को चौथे से सातवें सेमेस्टर में जोड़ा गया।


'विभाजन के लिए भी जिम्मेदार थे इकबाल'
राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम में बदलाव के बारे में पूछे जाने पर डीयू में एबीवीपी विंग ने कहा, 'मोहम्मद इकबाल को पाकिस्तान का दर्शन का जनक कहा जाता है। उन्होंने जिन्ना को मुस्लिम लीग में एक बड़े नेता के रूप में स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। मोहम्मद इकबाल विभाजन के लिए भी जिम्मेदार हैं। एबीवीपी और डीयू के छात्र इस कदम की सराहना करते हैं।'

स्पोर्ट्स कोटे पर चर्चा करने के लिए हुई थी बैठक
डीयू ने स्वतंत्रता और विभाजन स्टडी केंद्र के गठन जैसे कई प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिसका काउंसिल के कई सदस्यों ने विरोध किया। काउंसिल के सदस्य सदस्य मिठुराज धुसिया ने कहा कि केंद्र का प्रस्ताव विभाजनकारी है। इससे भड़काऊ और सांप्रदायिक भाषणों को बढ़ावा मिलेगा। काउंसिल की बैठक स्पोर्ट्स और एक्सट्रा करिकुलर एक्टिविटीज (ECA) के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए आयोजित की गई थी।


स्पोर्ट्स कोटे को घटाया
पिछले साल तक, कॉलेजों में 5% सीटें खेल और ईसीए श्रेणियों के तहत प्रवेश के लिए आरक्षित थीं। काउंसिल सदस्य डॉ. मेघ राज ने बताया कि इस बार स्पोर्ट्स कोटे को 5 फीसदी से घटाकर 2.5% कर दिया गया है। 5% के भीतर ECA का कोटा बनाया गया है। यह एक अच्छा कदम नहीं है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नियम के मुताबिक खेल श्रेणी के लिए 10% कोटा निर्धारित किया गया है।


काउंसिल के कई सदस्यों ने किया विरोध
बैठक में इंटिग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम को भी लागू करने का भी प्रस्ताव रखा गया। इस पर भी कुछ सदस्यों ने आपत्ति जताई। क्योंकि कई एडहॉक टीचर को हटाया गया है। डीयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष एके भागी ने कहा, हम समावेश की आवश्यकता पर जोर देते हैं क्योंकि मौजूदा एडहॉक और अस्थायी शिक्षकों का मुद्दा समानता, लैंगिक समानता, शिक्षकों की गरिमा और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के रखरखाव की बहाली की दिशा में एक कदम होगा।'


कॉलेजों को फंडिंग में देरी का उठा मुद्दा
डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (DTF) के परिषद के सदस्यों ने भी एक अधिसूचना पर आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि कॉलेजों को सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहना होगा। उन्होंने दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित 12 कॉलेजों को फंडिंग में देरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने विभागों के एचओडी की सर्विस को 70 साल तक बढ़ाने के डीयू के नोटिस पर भी सवाल उठाया।










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